Saturday, June 20, 2009
हिंदू समाज को दाह संस्कार की अनुमति नही इंग्लैंड में
70 साल के देवेन्द्र घई ब्रिटेन के न्यूकासल में रहते है, उन्होंने म्रत्यु के बाद अपने शव की दाह संस्कार की इच्छा जताई पर न्यूकासल की परिषद् ने इसे अस्वीकृत कर दिया बाद में इन्होने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की तो न्यायालय ने तथा इंग्लैंड के न्याय एवं कानून मंत्री जैक स्ट्रा ने गत ८ मई को यह कह कर घई की याचिका रद्द कर दी की उनका कानून मृतको के दाह संस्कार की अनुमति नही देता ! यह समाचार तो चुनावी परिणामो की सरगर्मी में दब कर रह गया ! कल्पना करे की भारत के ईसाई समुदाय को कह दिया जाता है की शवो को गाड़ने की प्रथा बंद कर दे ! यह कल्पना ही भारत में भूचाल लाने के लिए काफी है , मृतको को गाड़ने की बात तो अलग रही अपने देश में ईसाई और अन्य अल्पसंख्यको को विशेष अधिकार दिए हुए है ! ईसाई चर्च के तथा मुसलमान शरियत के अनुसार चलने को स्वतंत्र है ! विचारो और आचरण की जैसी तथा जितनी स्वतंत्रता भारत में रही है वैसी स्वतंत्रता की कल्पना भी पश्चिमी देश नही कर सकते ! (पाथेय कण , जून ०९ )
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1 comment:
dharm ka palan bhi ek param kartvya hai aur hamare hindu dharm me shav ko jalaya jata hai..
bahut achha ghatna bataya aapne.
dhanywaad
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